Sunday, August 19, 2018

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर इजराइल से आयी जबरदस्त खबर, कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष दंग


नई दिल्ली : पहले देश का बंटवारा करवाया, फिर कश्मीर समस्या को जन्म दिया, उसके बाद चीन के साथ युद्ध हारकर कांग्रेस ने देश की हजारों वर्ग किलोमीटर की जमीन गंवा दी. मुस्लिम तुष्टिकरण में लगी कांग्रेस ने कभी भारत के सच्चे दोस्त इजराइल के साथ रिश्ते मजबूत ही नहीं किये. मगर उसी इजराइल से अब बेहद हैरान करने वाली खबर आ रही है.
दरअसल 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए भारत ने परमाणु परीक्षण किया था. इस परमाणु परीक्षण से दुनिया के ज्यादातर देश आगबबूला हो उठे थे. अमेरिका सहित कई देशों ने तो भारत पर प्रतिबंध भी लगा दिए थे, उस समय इजराइल पूरी दुनिया में अकेला ऐसा देश था, जिसने भारत का समर्थन किया था.
खबर है कि इजराइल के विदेश मंत्रालय ने भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें ‘इजराइल का एक सच्चा मित्र’ बताया है. विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा, ‘भारत के पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के निधन पर हम भारत सरकार और उनके लोगों के प्रति गहरा दुख प्रकट करते हैं. उन्हें हमेशा इजराइल के एक सच्चे मित्र के तौर पर याद किया जाएगा.’

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी दिवंगत प्रधानमंत्री को ‘इजराइल का एक सच्चा मित्र’ बताते हुए संवेदनाएं जताईं. बाजपेयी सरकार के दौरान भारत और इजराइल के बीच राजनयिक संबंध बहुत तेजी से आगे बढ़े और उस स्तर पर पहुंच गए जहां इजराइल को भारत के भरोसेमंद साथी के तौर पर देखा जाने लगा. नेतन्याहू ने हाल ही में केरल में आई बाढ़ में जान गवांने वाले लोगों के परिवारों के प्रति भी अपनी संवेदनाएं जताईं. उन्होंने कहा, ‘इजराइल इस कठिनाई के समय में भारत के साथ खड़ा है.’

कारगिल वॉर के समय की थी मदद

कारगिल वॉर के समय भारत के लिए सबसे तेजी से मदद इजरायल ने ही भेजी थी. कई महत्वपूर्ण चीजों की सप्लाई इजरायल ने की थी. करगिल की चोटियों पर पाकिस्तानी सेना द्वारा जेहादी घुसपैठियों की शक्ल में भेजे गए पाकिस्तानी सैनिकों ने बर्फीले मौसम का फायदा उठाकर अपना डेरा जमा लिया था और वहां से वे भारतीय सैनिकों को निशाना बना रहे थे. इन चोटियों पर बैठे पाकिस्तानी सैन्य घुसपैठियों को तुरंत बेदखल करने का एक ही रास्ता था कि उन्हें हवाई हमलों से तहस-नहस किया जाए. लेकिन भारतीय लड़ाकू विमानों में सटीक निशाना लगाने वाली शस्त्र प्रणालियां नहीं थीं.

ऐसे ही संकट के वक्त इजरायल से लेजर डेजिगनेटर पाड आए और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों में इन्हें तैनात किया गया. इसके बाद तो पाकिस्तानी सेना के होश ही उडऩे लगे. करगिल की चोटियों पर एक-एक कर सभी पाकिस्तानी बंकर ध्वस्त होने लगे और पाकिस्तानी सेना पीछे लौटने को मजबूर हुई. इजरायल ने इंडियन आर्मी को सर्विलांस और बॉम्बिंग के लिए जरूरी सामान दिया. इसकी मदद से सेना ने कारगिल की ऊंची पहाड़ियों से एलओसी के उस तरफ बैठे दुश्‍मन को चारों खाने चित्‍त कर दिया.
रिपोर्टों की मानें तो कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना का ऑपरेशन सफेद सागर भी सफल नहीं हो पाता अगर इजरायली लेजर गाइडेड मिसाइल न हासिल हो पातीं. एयरफोर्स के फाइटर जेट्स ने इन्‍हीं लेजर गाइडेड बमों को पाकिस्‍तानी आतंकियों पर गिराया. अपने ड्रोन के लिए मशहूर इजरायल ने हेरॉन और सर्चर ड्रोन मुहैया कराया और इसकी वजह से सेना को पाकिस्‍तान के आतंकियों का पता लगाने में मदद मिली.
वाजपेयी सरकार के दौरान गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी और विदेश मंत्री जसवंत सिंह भी इजरायल की यात्रा पर गए थे. इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एरियल शेरोन भी 2003 में भारत की यात्रा पर आए थे. ये किसी इजरायली पीएम की पहली भारत यात्रा थी.

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